जागे
मेरा देश महान्
जागे
मेरा देश महान् जय भारत जय
हिन्दोस्तान,
जागे
मेरा देश महान्।।ध्रु॰।।
बेदज्ञान
का सूर्य उदय हो,
पुन: धर्म
का हो सम्मान
गौ
पूजा ,
गायत्री
का जप, गंगा गीता के गुणगान,
पुन:
जन्म लें इस धरती पर,
कर्मवीर
ऋषि मुनि महान् ।।१।।
ढूँढे से भी न दर्शन हों हैं दीन
दुखी के यहाँ कभी,
अन्न, वस्त्र, गृह, आत्मज्ञान के भरे
रहें भण्डार सभी।
फले-फूलें
फिर से जागती,
भारत देश यह विश्व महान्।।२।।
भौतिक
तम में भटक रहे,
मानव
को हम पुन:
बचायें,
और
पकड़ कर आत्मज्ञान के, राज
मार्ग पर लायें।
पुन:
विश्व
के प्राणीमात्र का अपने द्वारा
हो कल्याण ।।३।।
विश्व
गुरु
सिंहासन
पर, फिर
बैठे
भारत
माता,
दिखे
पुन:
संसार
चरण
में, माँ
को
शीष नवाता
I
हिमगिरि
के
शिखरों
पर
फहरे,
आर्य
देश
का
अमर
निशान
।।४।।
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